जब बाइनरी ऑप्शंस सबसे पहले आया था, यह तो साफ था कि ये प्रयोग करने में आसान और सभी के लिए काफी व्यापक है चाहे उनके अनुभव और ज्ञान का स्तर कुछ भी हो।

जैसा कि नाम से ही पता चलता है उपलब्ध प्रकार बाइनरी हैं जैसे जोड़े होते हैं। आगे समझाते हुए,  इसका मतलब यह है कि इसके केवल दो संभव परिणाम हो सकते हैं।

हम बाइनरी ऑप्शंस के प्रकारों (सबसे सामान्य) पर नज़र डालेंगे और आपके लिए सब कुछ  साफ कर देंगे।

High/Low

High/Low ऑप्शन अक्सर प्रयोग किया जाने वाला ऑप्शन है जो आप सभी प्लैटफॉर्मों पर देख सकते हैं।

मूलत: इस ऑप्शन का चुनाव करते समय आपको अनुमान लगाना होगा कि किसी आस्ति की कीमत समाप्ति अवधि के अंत में वर्तमान कीमत की तुलना में बढ़ेगी या घटेगी।

जैसा कि आप देख सकते है इस उदाहरण में केवल दो ही संभव परिणाम हो सकते हैं।

इस केस में सबसे महत्वपूर्ण कारकसमाप्ति अवधि है। समाप्ति अवधि आम तौर पर 60 सेकंड से शुरू होती है। कुछ ब्रोकर अपनी समाप्ति अवधि खुद सेट करते हैं जबकि अन्य स्वत: चयन होने देते हैं। अधिकतर मामलों में समाप्ति अवधि 15 से कुछ घंटों के बीच की रेंज होती है।

साफ तौर पर, अगर समाप्ति अवधि के अंत में कीमत बढ़ जाती है और आपने अपने पैसे High ऑप्शन पर लगाए थे तो आप विजेता हैं। अगर दूसरीओर, आपने High ऑप्शन चुना लेकिन समाप्ति अवधि के अंत में कीमत वास्तविक कीमत से कम है तो यह स्पष्ट रूप से नुकसान है और आप अपना निवेश गंवा देंगे।

 

One Touch/No Touch

One touch/No touch बाइनरी ऑप्शन प्रकार High/Low से बिलकुल अलग हैं। इस प्रकार के ऑप्शन की मुख्य बात यह है कि आपको अनुमान लगाना है कि कोई आस्ति समाप्ति अवधि से पहले किसी भी समय किसी निश्चित मूल्य बिन्दु पर पहुंचेगी या नहीं।

ट्रिगर बिन्दु कहीं भी किसी भी समय हो सकता है, महत्वपूर्ण बात है कि आस्ति को एक निश्चित मूल्य बिन्दु पर या तो पहुंचना “Touch” या नहीं पहुंचना  “No Touch” होगा अगर यही आपने चुना है

अगर ट्रेडर जीतने की स्थिति में है, रिवार्ड इस बात पर निर्भर करेगा  कि परिणाम कितना “प्रत्याशित” था। अगर उस बिन्दु तक पहुंचना (या न पहुंचना) आसान था तो निश्चित ही रिवार्ड कम होगा।

दूसरी ओर, अगर यह स्पष्ट नहीं है कि आस्ति उस बिन्दु को छूएगी या नहीं , तो रिवार्ड अधिक होगा।

 

Pair (जोड़े)

जोड़े या Pair वे बाइनरी ऑप्शन प्रकार हैं जिसमें आपको अनुमान लगाना होता है कि समाप्ति अवधि के अंत में किस आस्ति का मूल्य अधिक होगा। उदाहरण के लिए दो आस्तियां है A और B।

आप कहते हैं कि समाप्ति अवधि के अंत मेंआस्ति A की कीमत आस्ति B से अधिक होगी। अगर समाप्ति समय के अंत में A की कीमत B से अधिक है तो बधाई हो – आप जीत गए हैं!

अगर आपकी किस्मत इस बार खराब है और आस्ति B की कीमत ज़्यादा है तो आफ्ना निवेश किया हुआ धन गंवा देंगे।

Boundary/Range

एक तरफ High/Low ऑप्शन के साथ आपको अनुमान लगाना होता है कि कीमत किस दिशा में जाएगी , वहीं Boundry या range में आपको मूल्य रेंज सेट करनी होगी जिसके बीच आस्ति की कीमत रहेगी।

आपको दो ट्रिगर बिन्दु चुनने होंगे: न्यूनतम और अधिकतम। ट्रिगर बिन्दु वो मूल्य हैं जिन तक किसी भी समय आस्ति न पहुंचे ताकि आप धन कमा सकें।

स्पष्टतया, अगर आप अधिक व्यापक रेंज चुनते हैं जिनके बीच आस्ति रहनी है तो जोखिम कम होगा और रिवार्ड अधिक होगा।

Long Term/Short Term

सभी बाइनरी ऑप्शंस समय का समाप्ति समय होता है और इस बाइनरी ऑप्शन के साथ आप उस समय को सीमित कर सकते है जो आपके लिए सबसे बेहतर तरीके से कम करे। Short term ट्रेडर , ज़ाहिर तौर पर, जल्द जीतने (या जल्द हारने) के लिए बनाई गई हैं। इन ट्रेडो की अवधि 60 सेकंड से कई मिनटों तक हो सकती है।

दूसरी ओर, Long Term ट्रेड उनके लिए है जिनके पास कुछ समय है और वे परिणामका इंतज़ार कर सकते हैं। Long Term ट्रेड कुछ दिनों से लेकर क्कुह महीनों तक चल सकती है।

लेकिन हर ट्रेडर को यह ध्यान में रखना चाहिए कुछ महीनों में बाज़ार कई बार बादल सकता है और ऐसे मामले में अनुमान लगाना अधिक कठिन हो सकता है।

बहुत से बाइनरी ऑप्शन प्रकार हैं जिनमें से ट्रेडर चुनाव कर सकते हैं। यह उन ट्रेडरों के लिए बना है जो अपने लिए विकल्प खुले रखना चाहते हैं और अपनी इच्छानुसार ट्रेडिंग करना चाहते हैं।

अगर आप को लगता है कि ये ऑप्शन आपके समझने के लिए उपयुक्त हैं, तो देखिए कि  बाइनरी ब्रोकर क्या ऑफर कर रहे हैं और आपको और भी कई अनूठे प्रकार के बाइनरी ऑप्शन मिलेंगे जो ब्रोकरों ने ट्रेडरों के लिए बनाए हैं!

बाइनरी ऑप्शंस ट्रेडिंग के बारे में अधिक जानें:

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